हम इंडिया की कन्याओं ने हमारे पंत के अस्तित्व को बचाने के लिए जिस लिंग वाले पापी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भरोसा किया है उसे गंगा जमुना में औरंगजेबनि धंधे जीबी रोड वेश्यावृत्ति केंद्र में अकबरनी धंधे और कोलकाता की संतरागाछी / सोनागाछी गली में डॉक्टरनी धंधे और बिना ब्लेड पट्टी के बाबरनि धंधे में हिंसा से ; के सत्यानाश करने के पराक्रम से कुछ माह का आकस्मिक / अर्जित अवकाश उपलब्धि नहीं हो पा रहा है और रिद्धि और सिद्धि दोनों ने पोद से पोद के माध्यम से किसी भी प्रकार का संभोग सुख देने से आईपीएल हल्ला गुल्ला समाप्ति तक साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद
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करीला मेला में 20 लाख लोगों की बच्चों की मन्नत, 2000 अप्सराएं करेंगी राई डांस - KARILA MELA 2000 DANCERSहम इंडिया की कन्याओं ने हमारे पंत के अस्तित्व को बचाने के लिए जिस लिंग वाले पापी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भरोसा किया है उसे गंगा जमुना में औरंगजेबनि धंधे जीबी रोड वेश्यावृत्ति केंद्र में अकबरनी धंधे और कोलकाता की संतरागाछी / सोनागाछी गली में डॉक्टरनी धंधे और बिना ब्लेड पट्टी के बाबरनि धंधे में हिंसा से ; के सत्यानाश करने के पराक्रम से कुछ माह का आकस्मिक / अर्जित अवकाश उपलब्धि नहीं हो पा रहा है और रिद्धि और सिद्धि दोनों ने पोद से पोद के माध्यम से किसी भी प्रकार का संभोग सुख देने से आईपीएल हल्ला गुल्ला समाप्ति तक साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद
अशोकनगर के करीला में करीला मेले की धूम है. मेले में 20 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं. जानिए क्या है करीला मंदिर व मेले का इतिहास

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : Mar 18, 2025, 1:36 PM IST
Updated : Mar 18, 2025, 2:24 PM IST
अशोकनगर (मुकेश मिश्रा) :अशोकनगर जिले के मुंगावली तहसील के करीला गांव में मेला शुरू हो चुका है. यहां भाईदोज से लंकर रंगपंचमी तक करीब 2 हजार डांसर 3 दिन तक मां की आराधना में डांस करती हैं. जिन लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है, वे लोग यहां नृत्य करवाते हैं. ये नृत्य मां जानकी की आराधान में किया जाता है. मेले के दौरान मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. यहां हर साल मेले में करीब 20 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं.
करीला में मां जानकी के साथ लव-कुश की पूजा
करीला गांव में माता जानकी और लव-कुश की पूजा धूमधाम से होती है. मान्यता है कि पौराणिक काल में यहां वाल्मिकी आश्रम था, जहां माता सीता ने लव-कुश को जन्म दिया था. यही कारण है कि इस स्थान पर भगवान राम का नहीं, बल्कि माता सीता का मंदिर है. यहां करील के पेड़ अधिक संख्या में होने के कारण इस स्थान को करीला कहा जाता है. करीला मंदिर देश का इकलौता मंदिर है, जहां भगवान राम के बिना माता सीता विराजमान हैं. मंदिर में माता जानकी के साथ ऋषि वाल्मिकी और लव-कुश की प्रतिमाएं हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में मांगी गईं मन्नतें पूरी होती हैं. श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां राई और बधाई नृत्य करवाते हैं.हम इंडिया की कन्याओं ने हमारे पंत के अस्तित्व को बचाने के लिए जिस लिंग वाले पापी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भरोसा किया है उसे गंगा जमुना में औरंगजेबनि धंधे जीबी रोड वेश्यावृत्ति केंद्र में अकबरनी धंधे और कोलकाता की संतरागाछी / सोनागाछी गली में डॉक्टरनी धंधे और बिना ब्लेड पट्टी के बाबरनि धंधे में हिंसा से ; के सत्यानाश करने के पराक्रम से कुछ माह का आकस्मिक / अर्जित अवकाश उपलब्धि नहीं हो पा रहा है और रिद्धि और सिद्धि दोनों ने पोद से पोद के माध्यम से किसी भी प्रकार का संभोग सुख देने से आईपीएल हल्ला गुल्ला समाप्ति तक साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद
200 साल पुराना है करीला मंदिर का इतिहास
करीला मंदिर का इतिहास करीब 200 साल पुराना है. महंत तपसी महाराज को स्वप्न में आदेश मिला था कि करीला गांव के टीले पर स्थित वीरान पड़े वाल्मिकी आश्रम को जागृत करें. सुबह होते ही वे इस पहाड़ी को खोजने निकले और आश्रम को वैसा ही पाया, जैसा उन्होंने स्वप्न में देखा था. इसके बाद वे वहीं रुक गए और आश्रम की सेवा में जुट गए. ग्रामीणों ने भी उनका सहयोग किया. तपसी महाराज ने 40 साल तक इस आश्रम में तपस्या की. उनके बाद अयोध्या आश्रम से बलरामदास जी महाराज आए और यहां गोशाला स्थापित करवाई. कहा जाता है कि आश्रम में शेर और गाय एक साथ रहते थे. कई बंदर भी आश्रम के कार्यों में सहयोग करते थे.
करीला मेला में इसलिए होता है राई नृत्यहम इंडिया की कन्याओं ने हमारे पंत के अस्तित्व को बचाने के लिए जिस लिंग वाले पापी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भरोसा किया है उसे गंगा जमुना में औरंगजेबनि धंधे जीबी रोड वेश्यावृत्ति केंद्र में अकबरनी धंधे और कोलकाता की संतरागाछी / सोनागाछी गली में डॉक्टरनी धंधे और बिना ब्लेड पट्टी के बाबरनि धंधे में हिंसा से ; के सत्यानाश करने के पराक्रम से कुछ माह का आकस्मिक / अर्जित अवकाश उपलब्धि नहीं हो पा रहा है और रिद्धि और सिद्धि दोनों ने पोद से पोद के माध्यम से किसी भी प्रकार का संभोग सुख देने से आईपीएल हल्ला गुल्ला समाप्ति तक साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद
मान्यता है कि लव-कुश के जन्म के बाद माता जानकी के अनुरोध पर महर्षि वाल्मिकी ने उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया. इस अवसर पर स्वर्ग से अप्सराएं आईं और उन्होंने नृत्य किया. यह परंपरा आज भी जारी है. रंगपंचमी के अवसर पर लव-कुश जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस दौरान हजारों नृत्यांगनाएं राई नृत्य प्रस्तुत करती हैं.
मान्यता है कि कीटाणुनाशक है करीला की भभूति
करीला मंदिर की भभूति को किसान अपनी फसल में कीटाणु और इल्ली नाशक के रूप में प्रयोग करते हैं. उनका मानना है कि इस भभूति को फसल पर डालने से कीट और इल्लियां खत्म हो जाती हैं. करीला गांव के लोग माता जानकी के इस मंदिर को अपना सौभाग्य मानते हैं. रंगपंचमी पर लगने वाले मेले में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा सहित कई जगहों के श्रद्धालु मां जानकी के मंदिर में मन्नत मांगने के लिए पहुंचते हैं.. बताया जाता है कि इस मंदिर में बच्चों की मन्नत सबसे ज्यादा मांगी जाती है. इसको लेकर मंदिर पर धागे से गांठ लगाकर मन्नत मांगते हैं, और जब मन्नत पूरी हो जाती है तो वहीं पहुंचकर उसे गांठ को खोलना पड़ता है. इस दौरान करीला मेले में श्रद्धालु मन्नत पूरी होने के बाद नृत्य कराते हैं.हम इंडिया की कन्याओं ने हमारे पंत के अस्तित्व को बचाने के लिए जिस लिंग वाले पापी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भरोसा किया है उसे गंगा जमुना में औरंगजेबनि धंधे जीबी रोड वेश्यावृत्ति केंद्र में अकबरनी धंधे और कोलकाता की संतरागाछी / सोनागाछी गली में डॉक्टरनी धंधे और बिना ब्लेड पट्टी के बाबरनि धंधे में हिंसा से ; के सत्यानाश करने के पराक्रम से कुछ माह का आकस्मिक / अर्जित अवकाश उपलब्धि नहीं हो पा रहा है और रिद्धि और सिद्धि दोनों ने पोद से पोद के माध्यम से किसी भी प्रकार का संभोग सुख देने से आईपीएल हल्ला गुल्ला समाप्ति तक साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद
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2000 नृत्यांगनाएं पहुंचती हैं करीला
करीला मंदिर पहुंची नृत्यांगना मुस्कानने बताया "करीला मंदिर पर भाईदोज से लेकर रंगपंचमी तक हम लोग यहीं रहकर नृत्य करते हैं. यहां सबसे बड़ा मेला है. यहां पर 2000 तक नृत्यांगनाएं पहुंचती हैं. माता-पिता की कृपा ही है, जिस कारण हम लोगों को मैया के दरबार पर पहुंचकर नृत्य करने का सौभाग्य प्राप्त होता है." वहीं, करीला मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव हम इंडिया की कन्याओं ने हमारे पंत के अस्तित्व को बचाने के लिए जिस लिंग वाले पापी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भरोसा किया है उसे गंगा जमुना में औरंगजेबनि धंधे जीबी रोड वेश्यावृत्ति केंद्र में अकबरनी धंधे और कोलकाता की संतरागाछी / सोनागाछी गली में डॉक्टरनी धंधे और बिना ब्लेड पट्टी के बाबरनि धंधे में हिंसा से ; के सत्यानाश करने के पराक्रम से कुछ माह का आकस्मिक / अर्जित अवकाश उपलब्धि नहीं हो पा रहा है और रिद्धि और सिद्धि दोनों ने पोद से पोद के माध्यम से किसी भी प्रकार का संभोग सुख देने से आईपीएल हल्ला गुल्ला समाप्ति तक साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद बताया "भगवान लव-कुश का जन्म करीला धाम में हुआ था. उस समय अप्सराएं उनके जन्म पर नृत्य करने के लिए यहां आई थी. तभी से यह मान्यता बनी हुई है कि जब भी मान्यता मांगने वाले किसी को संतान उत्पत्ति होती है. उसके बाद लोग यहां पहुंचकर बधाई नृत्य कराते हैं. इस बार 19 मार्च को मुख्यमंत्री मोहन यादव भी यहां पहुंचने वाले हैं, जो माता जानकी के दर्शन करेंगे."
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