जब हमने लोकतंत्र के पांचवें स्तंभ की खोज करी, हमने संचार तंत्र के पांचवें माध्यम को डी के भट्ट की वेबसाइट को बनाया : तब हम इंसानों को समझ में आया कि हमारे सभी 5 तंत्र बिके हुए हैं और डी के भाटी को ना राजकुमारी सरपंच की पूजा पाठ का धंधा दिखता है , ना वह ममता होयामी की पूजा पाठ करना थोड़ा भी पसंद करता है ! वह 24 घंटे सातों दिन जब से भक्त बना है _ सरपंच पति की पूजा कर रहा है .
पिताजी ने पुत्रीयो की योनि का बुरा हाल कर दिया है Father has ruined his daughters vagina..... जब तक नाना डी के भाटी का पिता जी रामदास पाणिग्रही की मेहरबानी से धरती पर आगमन नहीं हुआ था, तब तक हम इंसान यह सोचते थे की बहन की चूत में राखी बांध देंगे, मां की पौंद में रक्षाबंधन मनाएंगे मदर्स डे मनाएंगे सिस्टर देवी मनाएंगे शादी धंधा भी करेंगे स्कूल धंधा करेंगे सरकारी नौकरी अफसरनी धंधा नीरजा माधवन बनेंगे, मेलामाइन का दूध भी पियेंगे, मॉर्निंग वॉक भी करेंगे, पेटीकोट में नाडा चड्डी बनियान ब्रा ब्लाउज साड़ी सीट बेल्ट और हेलमेट और मास्क का भी प्रयोग करेंगे एयरपोर्ट में मस्त एयरहोस्टेस नौकरी टावर फाइनेंस और डॉक्टरनी का धंधा भी मस्त चलेगा, पीएमटी परीक्षा देने के लिए 50 लॉख रुपए रिश्वत का सीआईडी एपिसोड उसी ipl सोनी लिव में दिखाया जाएगा जिसमें कौन बनेगा करोड़पति में श्रीमती जया बच्चन पोनद नहीं हिलाते वीडियो से विभिन्न प्रकार के अद्भुत प्रश्न पूछती है और उसका उत्तर हम सोशल मीडिया में ढूंढते हैं , सोशल डिस्टेंसिंग में ढूंढते हैं, सोशल लॉकडाउन में ढूंढते हैं ; कोरोना वायरस आता है hmpv फफूंद के बाद कम...








































































































































































































































































































हम इंसान चिड़िया जाति के पतन के बाद यह सोच रहे हैं कि बेघर इंजीनियर भाटी ने जिस प्रकार से 50 साल न सिर्फ अपनी उम्र बल्कि अपने स्क्रू के व्यक्तिगत लाभ के लिए नारी जाति और नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसानों = आईसीडीएस के अस्तित्व को बचा कर रखा है ; उसी प्रकार वह 100 साल और जी लेगा और यह मनुष्य जाति डी के भाटि के व्यक्तित्व और कृतित्व के भरोसे 50 साल और अस्तित्व में रह जाएगी तो हम इंसानों की है गलत फहमी है
ReplyDeleteWe humans are thinking after the decline of the bird species that the way the homeless engineer Bhati has saved the existence of women and male minor tasty humans = ICDS for 50 years not only for his age but also for the personal benefit of his screw; in the same way he will live for 100 more years and this human species will survive for 50 more years on the basis of the personality and work of D K Bhati, then we humans have a misconception.